महात्मा बुद्ध के अनमोल विचार

क्रोध को पाले रखना गर्म कोयले को किसी और पर फेंकने की नीयत से पकड़े रखने के सामान है,इसमें आप ही जलते हैं ।।

  • ईर्ष्या और नफरत की आग में जलने वाला मनुष्य चाहे कितने जतन करले,वह कभी सच्ची खुशी और हंसी नहीं प्राप्त कर सकता ।।

इच्छाओं का कभी अंत नहीं होता,अगर आपकी एक इच्छा पूरी होती है,तो दूसरी तुरंत जन्म ले लेती है ।।

  • किसी जंगली जानवर की अपेक्षा एक कपटी और दुष्ट मित्र से अधिक डरना चाहिए,जानवर तो सिर्फ आपके शरीर को नुकसान पहुंचता है जबकि दुष्ट मित्र आपकी बुद्धि को नुकसान पहुंचा सकता है ।।

शक की आदत से भयावह कुछ भी नहीं है, शक लोगों को अलग करता है, यह एक ऐसा ज़हर है जो मित्रता ख़त्म करता है और अच्छे रिश्तों को तोड़ता है, यह एक काँटा है जो चोटिल करता है, एक तलवार है जो वध करती है ।।

  • शांति अन्दर से आती है, इसे बाहर मत खोजो ।।

क्रोध को बिना क्रोधित हुए जीतो, बुराई को अच्छाई से जीतो, कंजूसी को दरियादिली से जीतो, और असत्य बोलने वाले को सत्य बोलकर जीतो ।।




क्रोध कितना नुक्सादेयी होता है,आप नीचे दी गयी कहानी पढ़िए समझ जाएंगे

एक बंद दुकान में कहीं से भटकता हुआ एक सांप घुस जाता है । दुकान में रखी एक आरी से टकराकर सांप थोड़ा सा जख्मी हो जाता है ।

घबराहट में सांप ने पलट कर आरी पर पूरी ताक़त से डंक मार दिया जिस कारण उसके मुंह से खून बहने लगता है ।अब की बार सांप ने अपने व्यवहार के अनुसार आरी से लिपट कर उसे जकड़ कर और दम घोंट कर आरी को मारने की पूरी कोशिश कर डाली।अब सांप अपने गुस्से की वजह से पहले से भी ज्यादा घायल हो गया । दूसरे दिन जब दुकानदार ने दुकान खोली तो सांप को आरी से लिपटा मरा हुआ पाया जो किसी और कारण से नहीं केवल अपनी तैश और गुस्से की भेंट चढ़ गया था ।

कभी कभी गुस्से में हम दूसरों को हानि पहुंचाने की कोशिश करते हैं मगर समय बीतने के बाद हमें पता चलता है कि हमने अपने आप का ज्यादा नुकसान किया है ।

दोस्तों कहानी का सार ये है की अच्छी जिंदगी के लिए हमें कुछ चीजों को,कुछ लोगों को,कुछ घटनाओं को,कुछ बातों को इग्नोर कर देना चाहिए । ताकतवर वही होता है जो मानसिक रूप से मजबूत हो क्योंकि इंसान की सबसे बड़ी शक्ति उसकी सहन शक्ति है । ये जरूरी नहीं कि हम हर एक्शन का एक रिएक्शन दें क्योंकि हमारे कुछ रिएक्शन हमें केवल नुकसान ही पहुंचाते हैं ।



 

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