समय यात्रा के भंवर में फंसा एयरक्राफ्ट-914

दोस्तों जब भी कोई हवाई जहाज राडार से गायब हो जाता है और काफी ढूंढने के बाद भी नहीं मिलता तो अक्सर यही मान लिया जाता है की वो जहाज या तो समुद्र में या फिर जमीन पर कहीं दुर्घटनाग्रस्त हो गया है । लेकिन आज हम आपको एक ऐसे जहाज के बारे में बताएँगे जो अपनी उड़ान पर निकलने के कुछ देर बाद ही गायब हो जाता है और कई सालों तक उसका कोई पता नहीं चलता लेकिन एक दिन वही जहाज अचानक किसी हवाई अड्डे पर उतरता है और लोगों के लिए तमाम सवाल खड़े कर देता है की इतने सालों तक यह जहाज कहाँ था और आखिर उन यात्रियों का क्या हुआ । दोस्तों वैसे तो हवाई जहाजों के गायब होने की यह पहली घटना नहीं थी इससे पहले भी बरमूडा ट्रायंगल के पास बहुत जहाज गायब हो चुके है,लेकिन आज हम आपको एक ऐसे जहाज के बारे में बताएंगे जो 37 सालों तक गायब रहा और एक दिन उसी स्थिति में वेनेजुएला के एयरपोर्ट पर उतरता है जिस स्थिति में वो 37 साल पहले उड़ता है । तो आइये दोस्तों इस घटना को विस्तार से जानते हैं ।

दोस्तों ये घटना है 21 मई 1992 की जब एक हवाई जहाज (Flight 914) वेनेजुएला के हवाई अड्डे पर लैंड करता है । हैरानी की बात तो यह है कि इस जहाज ने 22 जुलाई 1955 में 4 कर्मी दल के सदस्य और 57 यात्रियों के साथ न्यूयॉर्क से मयामी के लिए उड़ान भरी थी जो मयामी नहीं पहुंचा और रास्ते में ही कहीं गायब हो गया । इस घटना का मुख्य सबूत जहाज़ के पायलेट और कंट्रोल टावर के बीच हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग है तथा दूसरा सबूत 1955 का एक छोटा सा कैलेंडर है जो जहाज़ के पायलेट ने दुबारा उड़ान भरने से पहले रनवे पर छोड़ दिया था ।

कंट्रोल टावर के कर्मचारियों का कहना था कि उन्होंने इस घटना को अपनी आँखों से देखा था । कर्मचारियों का कहना था कि यह प्लेन कुछ अजीब और अलौकिक था जो बहुत पुराने मॉडल का लग रहा था तथा रडार स्क्रीन पर भी नहीं दिख रहा था । जहाज के रनवे पर उतरने से पहले पायलेट और कंट्रोल रूम के कर्मचारियों के बीच रेडियो कम्युनिकेशन द्वारा बातचीत हुई । जब कंट्रोल रूम के कर्मचारियों ने पायलट से उसका नाम पूछा तो उसने जबाब दिया की हम कहाँ हैं । उसकी आवाज से घबराहट और परेशानी का पता साफ-साफ लग रहा था । अंत में पायलट ने कहा कि यह एक चार्टर फ्लाइट 914 है जिसमें 57 यात्री सवार हैं और यह फ्लाइट न्यूयॉर्क से मयामी के लिए है ।  पाइलेट की यह बात सुनकर कंट्रोल रूम में सन्नाटा छा गया । क्योंकि फ्लाइट 914 का डेस्टिनेशन पॉइंट मयामी काराकास (वेनेजुएला) से 1800 किलोमीटर दूर था । तभी कंट्रोल रूम ने पाइलेट को जवाब दिया कि यह तो काराकास ( वेनेजुएला,साउथ अमेरिका ) है ,क्या आप खो गए हो ? पाइलेट की तरफ से कोई जबाब न मिलने पर भी कंट्रोल रूम ने मुसीबत में जानकर जहाज को रनवे पर उतरने की अनुमति दे दी और जहाज सफलतापूर्वक रनवे पर उतर गया ।

जैसे ही कंट्रोल रूम को लगा की अब स्थिति नियंत्रण में है तो उन्होंने पाइलेट की आवाज़ सुनी जो अपने साथी-पाइलेट से कह रहा था की देखो ये क्या अजीब सी चीज है,  जैसे उन्हें एयरपोर्ट पर खड़े जेट प्लेन को देखकर बहुत हैरानी हुई हो । कंट्रोल रूम के कर्मचारी डॉ. डेला कोर्ट के अनुसार पाइलेट ने बताया की यह फ्लाइट 1955 में मयामी के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुबह 9:55 पर लैंड होनी थी । तभी उन्होंने पाइलेट को बताया की यह काराकास ( वेनेजुएला) का इंटरनेशनल एयरपोर्ट है और आज 21 मई 1992 है । जहाज का पायलट डॉ. डेला कोर्ट की बात सुनकर भौचक्का रह गया, उसके मुंह से बस इतना ही निकला-ओह माय गॉड (हे भगवान्) ,जैसे वो अपनी साँसें ही भूल गया हो । डॉ. डेला कोर्ट ने पाइलेट का हौंशला बंधाने की कोशिश की और सहायता के लिए ग्राउंड स्टाफ भेजने की बात कही । यात्रियों के चेहरों को देखकर लग रहा था कि जैसे उन्हें किसी बात का आभास ही नहीं था,उन्हें तो अभी भी यही लग रहा था कि उन्होंने मयामी (फ्लोरिडा) में लैंड किया है और वे 1955 में ही हैं ।

जैसे ही ग्राउंड क्रू प्लेन के पास जाने लगा तो पाइलेट एकदम से चिल्लाया -नो डोन्ट,हमारे पास मत आना,हम जा रहें हैं । ग्राउंड क्रू ने बताया कि उस समय सभी यात्रियों के भौच्चके चेहरे नजर आ रहे थे जैसे वे कुछ समझ नहीं पा रहे थे की उनके साथ ये सब क्या हो रहा था । पाइलेट दूर से ही ग्राउंड स्टाफ को हाथ से इशारा कर रहा था और कह रहा था दूर जाओ यहाँ से । डॉ.कोर्ट के अनुसार उस समय पाइलेट के हाथ में एक फ़ाइल थी और वह फ़ाइल को हिलाते हुए ग्राउंड स्टाफ को वापिस जाने का इशारा कर रहा था । शायद यही वो समय था जब वह छोटा कैलेंडर रनवे पर गिर गया जो उन्हें बाद में मिला । पायलेट ने अफरा-तफरी में जहाज का इंजन स्टार्ट किया और प्लेन को फिर से उड़ा ले गया । बाद में कंट्रोल टावर के रेडियो में रिकॉर्ड हुए वार्तालाप और उस केलेण्डर को सरकार द्वारा जब्त कर लिया गया ।

दोस्तों इस घटना के पीछे का रहस्य अभी भी अनसुलझा है,जानकारों का मानना है कि या तो यह कोई अलौकिक घटना थी या फिर यह जहाज टाइम ट्रेवल करता हुआ 1955 से 1992 में आ गया था । ये बहुत ही हैरान कर देने वाला किस्सा है ,हैरानी की बात ये नहीं कि ये जहाज 37 वर्षों तक गायब रहा बल्कि ये की जो यात्री जिस अवस्था में गायब होते हैं उसी अवस्था में मिलते हैं यानी समय के बीतने का उनकी उम्र पर कोई प्रभाव नहीं होता है ।

क्या है टाइम ट्रेवल (What is time travel)

दोस्तों,टाइम ट्रेवल यानी समय यात्रा । यानी जो समय में यात्रा करता हो,समय में यात्रा करता हुआ आदमी वर्तमान को पीछे छोड़कर भविष्य में पहुँच सकता है और वर्तमान को छोड़कर भूतकाल में भी पहुँच सकता है । इस बात पर यकीन कर पाना किसी आम आदमी के लिए बहुत ही मुश्किल है परंतु हाल ही के वर्षों में ऐसी कई घटनाएं सामने आयी हैं जिन्होंने बड़े-बड़े वैज्ञानिकों और बुद्धिजीवियों का भी सिर चकरा दिया है । लेकिन बहुत से वैज्ञानिक समय यात्रा को काल्पनिक मानते हैं क्योंकि ऐसा मानने का उनके पास कोई ठोस कारण नहीं है । लेकिन कुछ वैज्ञानिक समय यात्रा की सम्भावना से इंकार भी नहीं करते हैं । वैसे देखा जाए तो हम सभी समय यात्रा कर रहे हैं,हम समय यात्रा करते हुए भूतकाल से वर्तमान,और वर्तमान से लगातार भविष्य की ओर जा रहे हैं । हमारे वर्तमान समय यात्रा की दर 1 घण्टा/घंटा है, यानी हमें भविष्य में 1 घंटा आगे जाने के लिए 1 घंटे का ही समय लगेगा । लेकिन यदि यही समय की गति 1 घण्टा/घंटा न होकर कम या ज्यादा हो तो व्यक्ति भविष्य या भूतकाल में जा सकता है ।

दोस्तों आपने वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन का नाम तो जरूर सुना होगा जिन्होंने 1915 में ‘थ्योरी ऑफ़ जनरल रिलेटिविटी’ सिद्धांत का प्रतिपादन किया । इस सिद्धांत के अनुसार समय हर परिस्थिति में एक ही गति में नहीं चलता है ,यानी समय की गति परिस्थिति के अनुसार कम या अधिक हो जाती है । जैसे नदी के पानी की रफ्तार कहीं कम तो कहीं ज्यादा होती है उसी प्रकार परिस्थिति के अनुसार समय की रफ़्तार कहीं कम तो कहीं ज्यादा है । जैसे इस समय मेरा समय जिस गति से चल रहा है हो सकता है कहीं और इसी समय की गति कुछ और हो । यानी जिस जगह समय की गति प्रकाश की गति से भी कई गुना तेज होती है वहां वह व्यक्ति वर्तमान समय से भी आगे भविष्य में चला जाता है । यानी एक उदहारण के लिए आप किसी तेज रफ्तार वाली रेल या जहाज में यात्रा कर रहे हैं तो आपके लिए समय बाहरी दुनिया की अपेक्षा धीमा हो जायेगा और जब आप उस रेल या जहाज से बाहर निकलोगे तो आप भविष्य में पहुँच जाओगे । हालांकि इतनी कम गति में चलने की वजह से आप एक सेकेण्ड के करोड़वें हिस्से जितना ही पहुँच पाओगे । ये मेने एक उदाहरण दिया है, जैसा की मेने पहले बताया की प्रकाश की गति के समान तेजी से चलने वाली किसी अंतरिक्ष में यदि कोई 50 साल का व्यक्ति यात्रा करता है तो वह व्यक्ति जब एक साल बाद वापिस पृथ्वी पर आता है तो पृथ्वी पर 60 साल बीत चुके होंगे यानी वह व्यक्ति भविष्य में पहुँच चुका होगा यानी उसकी उम्र अभी 51 वर्ष ही हुई है लेकिन वह पृथ्वी के समय की 60 वर्ष आगे की दुनिया देख चुका होगा अर्थात पृथ्वी के समय के अनुसार उसकी उम्र अभी 110 वर्ष हो चुकी होगी लेकिन हकीकत में अभी उसकी उम्र 51 वर्ष ही हुई होगी,क्योंकि वह व्यक्ति अंतरिक्ष में एक ही वर्ष रहा यानी उसकी उम्र एक ही वर्ष बीती है ।

इसका कारण बस समय की गति है जिस समय वह व्यक्ति अंतरिक्ष में यात्रा कर था तब अंतरिक्ष के समय की गति पृथ्वी के समय की गति से लाखों गुणा तेज थी । मगर ये गति वो अनुभव नहीं कर पाया जैसे मान लो कि हम किसी तेज गति की ट्रेन में बैठे हैं लेकिन जब तक कि हम ट्रैन की विंडो से झांककर नहीं देखेंगे हमें ट्रेन की गति का अनुभव नहीं होगा । शायद ऐसा ही कुछ उस प्लेन से साथ घटा होगा । 22 जुलाई 1955 को जब उसने न्यूयॉर्क से उड़ान भरी तो मयामी के लिए ये सफर मात्र साढ़े तीन घंटे का था । बाद में शायद वह जहाज एक ऐसे टाइम जोन में पहुंच गया होगा जहां समय की रफ्तार सामान्य गति से लाखों गुना अधिक होगी ओर 37 वर्ष बाद भी उन्हें ऐसा लग रहा होगा जैसे वो अभी साढ़े तीन घंटे के सफर में ही हैं ।

आइंस्टीन के इस सिद्धांत से पहले सभी को यह लगता था की ब्रह्माण्ड में सभी जगह समय की गति एक ही है । आइंस्टीन के इस सिद्धान्त के पश्चात् वैज्ञानिकों ने भी समय यात्रा की सम्भावना से इंकार नहीं किया । पृथ्वी पर कहीं-कहीं समय की गति कम अथवा ज्यादा होने के कारण ही यहाँ समय यात्रा की कई घटनाएं सामने आई हैं ।

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