शिरडी साईं बाबा मंदिर

विश्व प्रसिद्ध साईं बाबा का धाम महाराष्ट्र के शिरडी में स्थित है। शिरडी एक छोटा सा कस्वां है जो महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में है । शिरडी में साईं बाबा का भव्य मंदिर है । यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु साईं बाबा के दर्शन के लिए आते हैं तथा लाखों का चढ़ावा चढ़ाते हैं । ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मनौती को साईं बाबा जरूर पूरी करते हैं ।

कौन थे साईं बाबा

साईं बाबा कौन थे, वे कहाँ से आये थे,उनका जन्म कब हुआ,कहाँ हुआ,उनके माता-पिता कौन थे,इस बात को लेकर अलग-अलग दावे किए जाते रहे हैं । शिरडी में 1854 ई.में साईं बाबा को पहली बार देखा गया था । उस समय वह एक नीम के पेड़ के नीचे समाधि में लीन थे । उस समय उनकी उम्र लगभग 16 वर्ष थी । साईं बाबा की जन्म तिथि को लेकर भी मतभेद है । कुछ लोगों का दावा है कि उनका जन्म 28 सितंबर 1835 को हुआ जबकि कुछ के अनुसार उनका जन्म 27 सितंबर 1838 में हुआ । हर वर्ष 28 सितंबर को उनके जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है । ऐसा दावा किया जाता है कि साईं बाबा हिन्दू (ब्राह्मण) परिवार में पैदा हुए थे लेकिन उनका पालन-पोषण एक निसंतान मुस्लिम जोड़े ने किया था । शशिकांत शांताराम गड़करी ने अपनी रचना ‘सद्‍गुरु सांई दर्शन’ में बताया कि साईं बाबा ब्राह्मण परिवार से थे । उनके पिता का नाम गंगाभाऊ एवं माता का नाम देवकीगिरि था वहीं उनका वास्तविक नाम हरिबाबू भूसारी बताया गया है ।

साईं बाबा शिरडी में लगभग तीन वर्ष तक रहे । फिर अचानक वो शिरडी से गायब हो गए । कुछ बर्षों बाद वे चांद पाटिल नामक व्यक्ति के भांजे की बारात के साथ शिरडी वापिस आये थे तथा जीवनपर्यंत यहीं रहे । जब वह शिरडी वापिस लौट रहे थे तब शिरडी के मुख्य मार्ग पर स्थित खंडोबा मंदिर के पुजारी ने उनके स्वागत में उन्हें ‘आओ साईं’ कहकर पुकारा था । तबसे ही उन्हें साईं बाबा कहा जाने लगा। साईं बाबा शिरडी में अक्सर एक मस्जिद में रहा करते थे । उनके पहनावे व मस्जिद में रहने के कारण लोगों ने पहले तो उन्हें मुस्लिम फकीर मान लिया था । लेकिन उनके कार्यों से ऐसा लगता था कि वह किसी एक धर्म के पक्षवादी नहीं थे।वह मस्जिद में हिन्दुओं का त्यौहार रामनवमी व दीवाली मनाते तो मुसलमानों का त्याहौर भी वे यहां मनाते थे । वह मस्जिद में रोज दिया भी जलाते थे । साईं बाबा मस्जिद में ही अपने अनुयायियों को प्रवचन देते थे । साईं बाबा कहते थे कि राम और रहीम एक हैं । इसलिए धर्म के नाम पर झगड़ों को त्यागकर आपस में मिलजुल कर रहना चाहिए । संकट की स्थिति में सबको एक-दूसरे के काम आना चाहिए । उनका संदेश था कि सबका मालिक एक है, वही राम है वही रहीम है। साईं बाबा को हिन्दू और मुसलमान दोनों धर्म के लोग मानते थे । वे अपना ज्यादातर समय मुस्लिम फकीरों के साथ रहते थे । उनका पहनावा भी सूफी संतों जैसा था । शुरुआत में तो गांव के लोग साईं बाबा को पागल समझते थे लेकिन उन्होंने कई बार ऐसे चमत्कार दिखाये जिससे लोगों को उनमें ईश्वर के अंश की अनुभूति होने लगी । धीरे-धीरे उनके चमत्कारों के चर्चे आसपास के गांवों,शहरों व मुम्बई तक होने लगे थे । उनके भक्तों की संख्या बढ़ती चली गई। साईं बाबा का निधन 15 अक्टूबर 1918 को शिरडी में हुआ । उनकी समाधि पर ही साईं बाबा का मंदिर बनाया गया । इस मंदिर का निर्माण 1922 में कराया गया । यहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु अपनी श्रद्धा लेकर आते हैं । यह मंदिर भारत के सबसे अमीर मंदिरों में से एक माना जाता है । मंदिर को प्रतिवर्ष करोड़ों का चंदा प्राप्त होता है ।

साईं बाबा जन्मस्थल विवाद

इन दिनों साईं बाबा के जन्म स्थल को लेकर विवाद पैदा हो गया है । दरअसल महाराष्ट्र के परभणी जिले में शिरडी से 281 किमी दूर एक गाँव है पाथरी । पाथरी के लोगों का दावा है कि साईं बाबा का जन्म इसी गांव में हुआ था । पाथरी मुस्लिम बहुल इलाका है । इनका मानना है कि शिरडी साईं बाबा की कर्मभूमि है जबकि पाथरी उनकी जन्मभूमि । हालांकि पाथरी नामक गाँव आंध्र प्रदेश में भी है लेकिन ज्यादा दावा महाराष्ट्र के इस गांव को लेकर किया गया है ।

कैसे पहुंचे शिरडी

यदि आप मुम्बई में हैं तो आपको हवाई जहाज,बस,ट्रेन व टैक्सी का सहारा लेना पड़ेगा । यदि आप भारत में या दुनिया के किसी भी देश में हैं तो आपके लिए यह जानना जरूरी है कि आपको शिरडी आने के लिए पहले कहाँ आना होगा ।

  • मुम्बई से शिरडी दूरी- 250 किमी
  • नाशिक से शिरडी दूरी-85 किमी
  • औरंगाबाद से शिरडी दूरी- 125 किमी
  • दिल्ली से शिरडी दूरी- 1240 किमी
  • जयपुर से शिरडी दूरी-975 किमी
  • नजदीकी रेलवे स्टेशन-साईंनगर रेलवे स्टेशन (शिरडी से 5 किमी की दूरी पर)
  • शिरडी के सबसे नजदीकी एयरपोर्ट-शिरडी एयरपोर्ट, काकडी (14 किमी),औरंगाबाद एयरपोर्ट (125 किमी),नाशिक एयरपोर्ट (85 किमी)
  • गूगल मैप:https://maps.google.com/?cid=161492536327951220

आपको हर रेलवे स्टेशन व एयरपोर्ट पर टैक्सी की सुविधा मिल जाएगी । टैक्सी के जरिये आप बिना किसी दुविधा के आसानी से मंदिर पहुंच सकते हैं । यात्रियों के ठहरने के लिए यहां मंदिर के 1 किलोमीटर के दायरे में कई होटल व रेस्टोरेंट उपलब्ध हैं । आप इन्हें ऑनलाइन भी बुक कर सकते हैं ।

 

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